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Ram Navami Message 2024

Ram Navami as an important festival in India is not only for mirthful jubilation but can be used as a day of contemplation &. introspection. Hindus in India and abroad rejoice on this day and remember the glorious puranic past of India in which Shri Ram stands out flagrantly as the Maryada Purushottam which means the most ideal personality on earth. For the Shirdi Sai devotees, Ram Navami is traditionally celebrated in Shirdi as the birthday of Baba.



There is a reference about a ‘Ramdasi-panth’ lady (Chennai’s Bhajani Mela) in Shri Sai Satcharita (Chapter 29), where she saw the holy figure of Shri Ram in Baba and was moved emotionally. After meeting Baba, she expressed this to her husband. There is also a mention of a doctor who visited Baba with his friend (Mamlatdar, i.e., Revenue Officer) in Shri Sai Satcharita (Chapter 12). He saw Shri Ram in Baba and prostrated before Him.


Shri Ram and Ramayana, which stands for the epical war between Ram and Ravana, reflects the opposition of the good and the evil in human society ultimately leading to the rightful assertion of the good in the process. Shri Ram’s life reflects that he stood for truthfulness, sacrifice, kindness, and generosity of the highest order.


These are the virtues on which the devotees of Shri Shirdi Saibaba should reflect while remembering their Guru on this day.


Jai Shri Sai

Dr. Chandra Bhanu Satpathy

Gurugram





 

रामनवमी संदेश 2024

भारत में रामनवमी एक महत्वपूर्ण पर्व के रूप में केवल हर्षोल्लास के लिए ही नहीं , अपितु इसे चिंतन और आत्मनिरीक्षण के दिन के रूप में भी प्रयुक्त किया जा सकता है। भारत और विदेशों में हिंदू इस दिन खुशी मनाते हैं और भारत के गौरवमय पौराणिक अतीत को याद करते हैं, जिसमें श्री राम सुस्पष्टता से मर्यादा पुरुषोत्तम , जिसका अर्थ है - पृथ्वी पर सबसे आदर्श व्यक्तित्व, के रूप में दिखाई देते हैं। पारंपरिक रूप से शिरडी साईं- भक्तों के लिए, रामनवमी शिरडी में बाबा के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है।


’श्री साईं सच्चरित्र’ (अध्याय 29) में एक ’रामदासी- पंथ’ की महिला (चेन्नई का भजनी मेला) के बारे में एक संदर्भ है, जहाँ उसने बाबा में श्री राम की पावन छवि देखी और भावुक हो गई। बाबा से मिलने के बाद उसने यह बात अपने पति को बताई। ’श्री साईं सच्चरित्र’ (अध्याय 12) में एक डॉक्टर का भी उल्लेख है, जो अपने मित्र (मामलतदार, अर्थात्् राजस्व अधिकारी) के साथ बाबा के पास गये थे। उन्होंने बाबा में श्री राम के दर्शन किये और उन्हें साष्टांग प्रणाम किया।


श्री राम और रामायण- जो कि राम और रावण के बीच महाकाव्यात्मक युद्ध का प्रतीक है, मानव-समाज में अच्छाई और बुराई के विरोध को दर्शाते हैं, जो अंततः इस प्रक्रिया में अच्छाई को आदर्श रूप में स्थापित करते हैं। श्री राम का जीवन दर्शाता है कि वे आजीवन उच्चतम कोटि की सत्यता, त्याग, दयालुता और उदारता के प्रति दृढ़ रहे।


ये वे गुण हैं जिन पर इस दिन श्री शिरडी साईंबाबा के भक्तों को अपने गुरु को याद करते समय चिंतन करना चाहिए।


जय श्री साईं

-डॉ. चन्द्रभानु सतपथी

गुरुग्राम

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